Atankvaad

Complimentary Offer

  • Pay via readwhere wallet and get upto 40% extra credits on wallet recharge.
Atankvaad

Atankvaad

This is an e-magazine. Download App & Read offline on any device.

Preview

अच्छा नागरिक’ शृंखला की कड़ी में प्रस्तुत यह पुस्तक आतंकवाद की त्रासदी का आकलन वैश्विक परिदृश्य में करती है। इसमें आतंकवाद की समसामयिक घटनाओं की चर्चा तो की ही गई है, इसके अतीत का भी आकलन किया गया है। इसमें आतंकवाद व आतंकवादी शब्दों की विभिन्न व्याख्याएं भी शामिल हैं। आतंकवाद को परिभाषित करना और सउदाहरण इसके कारकों को प्रस्तुत करना ही इस पुस्तक का मुख्य उद्देश्य है। इतिहास साक्षी है कि स्वतंत्राता के लिए संघर्षरत लोगों को आतंकवादी कहा गया है। यहां उन लोगों के नजरिए को भी प्रस्तुत किया गया है, जो उन्हें आतंकवादी मानते थे। इस पुस्तक में हिंसा, धमकी, अपहरण, बमबारी जैसे घृणित अपराधों को करने के पीछे की मंशा की विस्तार से चर्चा की गई है। आतंकवादियों की नृशंस हरकतों के कारण बेगुनाह लोगों में पैदा होने वाले भय, घावों को इसके प्रत्येक पृष्ठ पर महसूस किया जा सकता है। जेहाद का जुनून और उसके पीछे छिपी मंशा, धर्मांधता के नाम पर बेकसूरों का खून-खराबा, कट्टरता और उसके तरीके, सामाजिक उद्देश्यों के नाम पर सशस्त्रा संघर्ष जैसी बातें मानवता के लिए चुनौती हैं और इनमें लगातार वृद्धि हो रही है। अविश्वास की भावना का प्रसार और अलगवावाद वैश्वीकरण का दुश्मन और सार्वत्रिक भाईचारे की भावना के विपरीत है। समुदाय, धर्म, संगठन, वर्ग या जाति के नाम पर जुड़ाव हमें कहीं ना कहीं ऐसे हिंसक मार्ग की ओर अग्रसर करता है, जो सामाजिक समानता, धार्मिक अधिकार या पंथ के उत्थान, यहां तक कि संवैधानिक अधिकार के नाम पर तैयार किया जाता है। लेकिन अतीत यह सिद्ध कर चुका है कि हिंसा के बल पर सामाजिक बदलाव संभव नहीं है। यह पुस्तक आपको आतंकवादियों द्वारा जानबूझ कर की गई हरकतों के आकलन के प्रति सजग बनाती है। हालांकि जिस किसी ने भी धर्म, वर्ग, समुदाय और जाति के नाम पर वैश्विक भाईचारे की भावना के विपरीत हिंसा का सहारा लिया है, उसे कुछ नहीं मिला है और उसका कोई नामलेवा नहीं बचा है। विश्व की विभिन्न हस्तियां, आतंकवाद को किस तरह आकलित करती हैं, इसके उदाहरण ‘सूक्तियां’ अध्याय में प्रस्तुत किया गया है। पाठक ने इस पुस्तक को पढ़ कर क्या महसूस किया? पुस्तक के अंत में दिया गया ‘आत्म निरीक्षण’ इसी का आकलन करता है।