TOUCH THERAPY टच थेरेपी


Buy Now @ ₹ 125.00 Preview
pलेखक की कलम, उसका गहन दृष्टिकोण, उसकी कल्पनाशक्ति, संवेदना, उसके अनुभव, जीवन के विभिन्न पहलुओं में से किसी विशेष पात्र को उठाकर जब चलती है तो उसमें सजीवता खुद ब खुद झलकने लगती है।brलेखक का सदैव यही प्रयास रहता है कि अपनी लेखन शैली से वह व्यक्ति, परिवार, समाज, देश को सकारात्मक संदेश दे सके।brमैं भी हाइकु, कविताएं, लघुकथा, कहानियां लिखती हूं और हमेशा यही प्रयास करती हूं कि ऐसा लिखूं कि लोगों को अच्छा पढ़ने के लिए मिले।brएक साहित्यकार को भी वैज्ञानिक दृष्टिकोण रख, शोधात्मक होना चाहिए। अपने घर, परिवार, अपने आस-पास के परिवेश में वह इतना तो अध्ययन कर ही सकता है कि लोग क्या पढ़ना चाहते हैं किस तरह का साहित्य पसंद किया जा रहा है विशेष रूप से युवा पीढ़ी के बीच...!brएक लेखक कितनी भी अच्छी कलम क्यों न चलाता हो लेकिन अपनी इच्छाओं और अपने विचारों को किसी पर थोप नहीं सकता..।brजब उसकी कलम पाठकों की पसंद नापसंद के अनुरूप चलेगी तभी उसकी लेखनी की सार्थकता सिद्ध होगी।brमैंने नोटिस किया कि युवा वर्ग लंबी कहानी न पढ़ते हुए छोटी कहानियां ज्यादा पसंद करता है। तब मैंने लघुकथा लिखना प्रारम्भ किया।brउद्देश्य राह सही हो तो मंजिल सरलता से मिलती है।brलघुकथा लिखते समय मैंने सोचा कि मेरा जन्म तो बस्तर अंचल में हुआ और मैं वहां की आदिवासी परंपराओं, रीति रिवाज को देखती समझती रही हूं, वहां की सुरम्य प्रकृति, वहां की मिट्टी, लोककला, नृत्य आदि का मेरे जीवन पर बहुत प्रभाव रहा... तो क्यों न बस्तर को लोगों तक पहुंचाया जाए p