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सूबे में केसरिया सरकार को काबिज हुए डेढ़ साल का वक्त गुजर चुका है। जनता की आशा और अपेक्षा के सैलाब को मूल्यांकन के पुल पर कदमताल करते हुए पार उतरा है, वक्त का हर लम्हा। दरअसल हर गुजरता लम्हा अपने आप में आईना है। और आईने में विगत दस वर्षों से दुव्र्यवस्था के घोर अंधेरों में भटकती कानून-व्यवस्था का अक्स बहुत खूबसूरत नहीं उभर रहा है। आज भी उसमें आधी आबादी डरी-सहमी ही नजर आ रही है। अपराधी और शोहदे बाकायदा अस्मतरेजी कर वीडियो तक वायरल कर रहे हैं। लेकिन उसी आईने में पुलिस की गोली का शिकार बन रहे, जान बचा कर भाग रहे अपराधियों के अक्स भी उभर रहे हैं, जो पिछले दस वर्षों में कभी देखने को नहीं मिले। तो आइये देखते हैं एक योगी की हुकूमत में कानून का इकबाल कैसा होता है क्या एक योगी की नुमाइन्दगी में महफूज, महसूस रही है सूबे की आधी आबादी! अपराधियों के लिए अब तक सफारी जोन बना सूबा, क्या अब आम अवाम के लिए सेफ है या आज भी हुकूमत का इकबाल दूर किसी पेड़ पर क्षत-विक्षत अवस्था में उल्टा टंगा नजर आ रहा है