SRISHTI (सृष्टि)

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सृष्टि के नियम अपरिवर्तित हैं जिन्हें मनुष्य चाह कर भी कभी नहीं बदल सकता जैसे कि पृथ्वी की गुरूत्वाकर्षण शक्ति । पूर्व में सूर्य का उदय होना, पश्चिम में ढल जाना । रात का होना, दिन का होना । पृथ्वी का अपनी धुरी पर घूमना । सूर्य, चाँद, सितारों भरा आकाश । हवाओं का चलना । बादलों का बनना, पानी का बरसना । जन्म, मरण ये सब प्राकृतिक घटना है ये सब कार्य सृष्टि के नियमानुसार हो रहें हैं । इसी प्रकार की अनेकों घटनायें हैं जिन्हें हम कभी भी नहीं बदल सकते । इतने बड़े संसार में मनुष्य के अलावा भी बहुत प्राणी निवास करते हैं विभिन्न प्रकार के पेड़ – पोधों और अनेकों प्रकार के जड़ – चेतन हैं सबके अपने स्वभाव, गुण धर्म एवं उपयोगिता हैं । भले हम इस रहस्य को नहीं समझ पाये हैं लेकिन कोई भी वस्तु यहां बेकार नहीं है जिसका यहाँ उपयोग न हो, यह कितना बड़ा आश्चर्य है । हमेशा से ही प्रकृति के साथ चलने पर एवं उसके नियमों का पालन करने पर हम इस संसार में सुरक्षित रह सकते हैं नियमों को तोड़ने या प्रकृति के साथ खिलवाड़ करने पर हमें कई प्रकार की आपदाओं का सामना करना पड़ता है । हमें जरूरत है प्रकृति के साथ तारतम्य बिठा कर चलने की, एक सीमा के अन्दर प्राकृतिक संसाधनों के दोहन की । अत: हमें प्रकृति के नियमों के अनुसार ही चलना है जिससे कि सभी प्राणी स्वस्थ सुन्दर और खुशहाल जीवन जी सकें । मैने जो भी लिखा और प्रयास किया है मुझे उम्मीद है कि पाठकों को पसंद आयेगा । यह मेरी काव्य रचना है , आशा है आपका आशीर्वाद मिलेगा ,