Ehsas Ke Gunche

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जीवन मूल्यों के सतत आरोह-अवरोह, दोहरे मापदंड, समय की विद्रूपताएँ, प्रकृति के प्रति उदासीनता और समाज की दिखावटी सोच ने मेरे भीतर पनपती कविता को शब्दों का ताना-बाना बुनने के लिये भावभूमि तैयार की। कविता में लोक-संस्कृति, आँचलिकता के सांस्कृतिक आयाम, समसामयिक घटनाएँ, पर्यावरण के समक्ष उत्पन्न ख़तरे, जीवन-दर्शन, सौंदर्यबोध के साथ भावबोध, वैचारिक विमर्श को केन्द्र में रखते हुए संवेदना को समाहित कर कविता बनीं। जिसके फलस्वरूप मेरा पहला काव्य-संग्रह ‘एहसास के गुँचे’ सामाजिक सरोकारों के साथ-साथ प्रेम, जीवन-दर्शन, नारी-विमर्श, देशप्रेम और प्रकृति पर मेरे चिंतन के साथ आपके समक्ष प्रस्तुत है। आशा है संग्रह की कविताएं आपके मर्म को छूने का प्रयास करेगी। ‘एहसास के गुंचे’ काव्य-संग्रह आपके हाथों में सौंपते हुए मुझे अपार हर्ष की अनुभूति हो रही है।