Humsafar
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कवि अरुण कुमार जी ने ऐसी ही कविताओं की रचना की है, जिसे पढ़कर आप भी खुशियों से विभोर हो जायेंगे। आपका मन प्रसन्न हो जाएगा। यहां उजास की बात है तो ढलते शाम की परिकल्पना भी। अरुण जी ने अपने जीवन के सफ़र को हमसफ़र में उतारा है। बचपन से लेकर युवावस्था तक की कहानी उनके हमसफर में वर्णित है। यही खासियत है कि उनके वजूद को उनकी ही कविताएं अमर बनाती है, और कवि को नई पहचान देती है।

अभी' हमसफ़र' आपके हाथ में है तो सफ़र में हमसफर का आनंद ले। जब भी मन करे, हमसफ़र के साथ सफ़र पर चलिये, ख़ुद भी पढ़िए और दूसरों को भी पढ़ाइए। हमसफ़र पढ़कर आशा, ऊर्जा और कुछ कर गुजरने  की तमन्ना होगी। 

हमसफ़र पठनीय और  संग्रहनीय है।