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इश्क़ की उम्र भरोसे के पैरों पर टिकी होती है। जहाँ भरोसा टूटा वहाँ इश्क़, इश्क़ नही रहता बोझ बन जाता है। और कोई भी दिल इस बोझ को लेकर ज़िन्दा नही रह सकता। इस उपन्यास की नायिका मोना इश्क़ तो करती है लेकिन भरोसा नही पाती। 'फ़रेब' उपन्यास की मुख्य नायिका मोना और इश्क़ वाली बेतरतीब ज़िन्दगी ही इसकी मुख्य कहानी है। -- भारतीय रेल सेवा में चीफ़ कंट्रोलर पद पर कार्यरत, युवा हिन्दी लेखक पॉल संजय मूल रूप से बिहार के मोतिहारी (चम्पारण) के रहने वाले हैं। इन्होंने प्रारंभिक से लेकर स्नातक की पढ़ाई मोतिहारी से पूरी की है तथा स्नातक की पढ़ाई के बाद प्रतियोगी परीक्षा पास कर कोलकाता मेट्रो रेल में सहायक स्टेशन मास्टर के पद पर चार साल सेवा देने के बाद नौकरी से इस्तीफ़ा दे दिया और रेलवे की एक अन्य प्रतियोगी परीक्षा पास कर साउथ ईस्टर्न रेलवे में कंट्रोलर पद पर चयनित हो गये। पॉल संजय जी वर्तमान में चक्रधरपुर (झारखंड) मंडल, जो कि भारतीय रेलवे में सर्वाधिक रेवेन्यु देने वाले मंडलो में से एक है, के चीफ़ कंट्रोलर पद पर रहकर भारतीय रेलवे की सेवा कर रहे हैं। कॉलेज के दिनों से ही इन्हें लिखने का शौक रहा है।