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लॉकडाउन गाम आ गोनुआ के विवाह Lockdown Gam Aa Gonua's Marriage
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लॉकडाउन गाम आ गोनुआ के विवाह Lockdown Gam Aa Gonua's Marriage

By: ANURADHA PRAKASHAN (??????? ??????? ?????? )
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About this issue

आत्मोद्‌गार
विश्व कुख्यात भयौन करोना काल में जीवन कोना ठप्प भ गेल छल, जे जतय छल से ओहि ठामक परिस्थिति के जंजाल मे लेपटायल रहि गेल छल। सरीपहु, ओ एक गोट आधुनिक युगक प्रलय काल छल, जं ई कहीं तं कोनो अतिशयोक्ति नहिं होयत। प्रवासी शहरी आबादी, जे होली पावनि के तातील में अपन अपन गाम घर गेल हेताह से त'ओहि ठाम विद्यमान ठलेथे, एतवे में ओहि संध्या काल देश भर में "लॉकडाउन" क उद्घोषणा भ गेल जे रात्रि के बारह बजे स सब किछू बन्न। आ यातायातक सब साधन ठप्प। बुझु त', जेना उजाही लागि गेलै। सब ठाम पड़ाहि लागि गेल छल, आ महानगरक, नगरक, प्रवासी, श्रमजीवी सब कहुना, करिक, पैरे पैरे वा निजी वाहन क' मुंह मांगा पाय झी'कि क अपन' अपन गाम में शरण नेने छल। गामक सीमा प कतेको 'कोरेंनटाईन' स्थान बनाओल गेल जतय सब के, विशेष रूप स, ज'र' बोखार आ करोना के लक्षण बाला सब के रो'कि क डाक्टरी जांच कयल जाय। कतेको चोरा नुका क, प्रशासनक आखि में धूरि झऑकि क, अपन घर में घुसि आबैक। कूजरनी सब के गाम घर में पैसनाय बंद। सभक दरवज्जा, दालान जेना मीडिया के दफ्तर वनि' गेल छल, समाचार सच वा फुईसक प्रचार होबइत रहल। अहि मध्य हम सब सेहो करीब आठ मास धरि ("जी हमरा करी'ना नहिं होय'ता' आ घबड़ा क हमरा दिल्ली नहिं आनल जयते' त आ' और समय लगिते)" "गामक अहि हलचल के प्रत्यक्ष अनुभव कयने छलहू। अपन घर पैसल, सासू माँ, अड़ोसीया' पड़ोसिया काकी, क'का दीयर ननदि, ख'वास, चरवाहा, भंसिया, आदि के गप्प सप्प सब स हुनक मनोस्थिति स अवगत होमैत, हुनक सभक लागि लपेटक गप्प सप्प के अपन डायरी में टीपत रहलहू, जे एक रिपोर्ट, एक गोट पोथी के रूप लय नेने अछि।
गाम मे सबके बजवा के, अपन आवाज़ उठेबाक अधिकार है। पहिनुका जमींदार गिरहथनी स' खबासिन सेहो साधिकार, निडर म' क' गप्प करईत छली, आ आईयो करैत अछि। धर्म, वर्ण, अर्थ स पृथक समाज'क मध्य समरसता, सामंजस्यता सेहो अछि, वैमनस्य सेहो चरम सीमा प अछि, मुदा लोक लाज, मर्यादा तेकरो सर्वथा उल्लंघन नहिं कयल जाय अछि।

About लॉकडाउन गाम आ गोनुआ के विवाह Lockdown Gam Aa Gonua's Marriage

आत्मोद्‌गार
विश्व कुख्यात भयौन करोना काल में जीवन कोना ठप्प भ गेल छल, जे जतय छल से ओहि ठामक परिस्थिति के जंजाल मे लेपटायल रहि गेल छल। सरीपहु, ओ एक गोट आधुनिक युगक प्रलय काल छल, जं ई कहीं तं कोनो अतिशयोक्ति नहिं होयत। प्रवासी शहरी आबादी, जे होली पावनि के तातील में अपन अपन गाम घर गेल हेताह से त'ओहि ठाम विद्यमान ठलेथे, एतवे में ओहि संध्या काल देश भर में "लॉकडाउन" क उद्घोषणा भ गेल जे रात्रि के बारह बजे स सब किछू बन्न। आ यातायातक सब साधन ठप्प। बुझु त', जेना उजाही लागि गेलै। सब ठाम पड़ाहि लागि गेल छल, आ महानगरक, नगरक, प्रवासी, श्रमजीवी सब कहुना, करिक, पैरे पैरे वा निजी वाहन क' मुंह मांगा पाय झी'कि क अपन' अपन गाम में शरण नेने छल। गामक सीमा प कतेको 'कोरेंनटाईन' स्थान बनाओल गेल जतय सब के, विशेष रूप स, ज'र' बोखार आ करोना के लक्षण बाला सब के रो'कि क डाक्टरी जांच कयल जाय। कतेको चोरा नुका क, प्रशासनक आखि में धूरि झऑकि क, अपन घर में घुसि आबैक। कूजरनी सब के गाम घर में पैसनाय बंद। सभक दरवज्जा, दालान जेना मीडिया के दफ्तर वनि' गेल छल, समाचार सच वा फुईसक प्रचार होबइत रहल। अहि मध्य हम सब सेहो करीब आठ मास धरि ("जी हमरा करी'ना नहिं होय'ता' आ घबड़ा क हमरा दिल्ली नहिं आनल जयते' त आ' और समय लगिते)" "गामक अहि हलचल के प्रत्यक्ष अनुभव कयने छलहू। अपन घर पैसल, सासू माँ, अड़ोसीया' पड़ोसिया काकी, क'का दीयर ननदि, ख'वास, चरवाहा, भंसिया, आदि के गप्प सप्प सब स हुनक मनोस्थिति स अवगत होमैत, हुनक सभक लागि लपेटक गप्प सप्प के अपन डायरी में टीपत रहलहू, जे एक रिपोर्ट, एक गोट पोथी के रूप लय नेने अछि।
गाम मे सबके बजवा के, अपन आवाज़ उठेबाक अधिकार है। पहिनुका जमींदार गिरहथनी स' खबासिन सेहो साधिकार, निडर म' क' गप्प करईत छली, आ आईयो करैत अछि। धर्म, वर्ण, अर्थ स पृथक समाज'क मध्य समरसता, सामंजस्यता सेहो अछि, वैमनस्य सेहो चरम सीमा प अछि, मुदा लोक लाज, मर्यादा तेकरो सर्वथा उल्लंघन नहिं कयल जाय अछि।