भारत की नौसैनिक परंपरा साहस, अनुशासन और राष्ट्रनिष्ठा की अनुपम मिसाल रही है।
वर्ष 1971 का भारत-पाक युद्ध केवल एक सैन्य संघर्ष नहीं था, बल्कि यह भारतीय स्वाभिमान और संकल्प की निर्णायक परीक्षा भी थी। इसी युद्ध के दौरान भारतीय नौसेना का ऐतिहासिक पोत INS खुकरी राष्ट्ररक्षा के अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए वीरगति को प्राप्त हुआ।
यह पुस्तक "1971-खुकरी एक नौसैनिक की अनकही कहानी" केवल एक युद्धपोत का इतिहास नहीं है, बल्कि यह उन मूल्यों की कथा है, जिन पर भारत की सैन्य परंपरा आधारित है-कर्तव्य, बलिदान और नेतृत्व ।
कप्तान एम. एन. मुल्ला जैसे अधिकारी भारतीय नौसेना की उस गौरवशाली परंपरा का प्रतीक हैं, जहाँ व्यक्तिगत सुरक्षा से पहले राष्ट्र सर्वोपरि होता है।
प्रकाशक के रूप में हमारा यह विश्वास है कि यह कृति विशेषकर युवा पीढ़ी को राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व, साहस और आत्मबल का संदेश देगी।
यह पुस्तक इतिहास का स्मरण कराने के साथ-साथ भविष्य को दिशा देने का भी प्रयास है।
भारत की नौसैनिक परंपरा साहस, अनुशासन और राष्ट्रनिष्ठा की अनुपम मिसाल रही है।
वर्ष 1971 का भारत-पाक युद्ध केवल एक सैन्य संघर्ष नहीं था, बल्कि यह भारतीय स्वाभिमान और संकल्प की निर्णायक परीक्षा भी थी। इसी युद्ध के दौरान भारतीय नौसेना का ऐतिहासिक पोत INS खुकरी राष्ट्ररक्षा के अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए वीरगति को प्राप्त हुआ।
यह पुस्तक "1971-खुकरी एक नौसैनिक की अनकही कहानी" केवल एक युद्धपोत का इतिहास नहीं है, बल्कि यह उन मूल्यों की कथा है, जिन पर भारत की सैन्य परंपरा आधारित है-कर्तव्य, बलिदान और नेतृत्व ।
कप्तान एम. एन. मुल्ला जैसे अधिकारी भारतीय नौसेना की उस गौरवशाली परंपरा का प्रतीक हैं, जहाँ व्यक्तिगत सुरक्षा से पहले राष्ट्र सर्वोपरि होता है।
प्रकाशक के रूप में हमारा यह विश्वास है कि यह कृति विशेषकर युवा पीढ़ी को राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व, साहस और आत्मबल का संदेश देगी।
यह पुस्तक इतिहास का स्मरण कराने के साथ-साथ भविष्य को दिशा देने का भी प्रयास है।