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Sat Chit Anand सत् चित् आनन्द
Sat Chit Anand सत् चित् आनन्द

Sat Chit Anand सत् चित् आनन्द

By: ANURADHA PRAKASHAN (??????? ??????? ?????? )
170.00

Single Issue

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About this issue

अपनी मौलिक भावनाओं को सहेज कर मूर्त-रूप देते हुए कागज़ पर कुछ अर्थपूर्ण आकार देना और उसे काट-छाँट करके फिर अपने अनुरूप अन्तिम रूप देना-यही लेखन है। लेखन की सबसे सरल विधा धारा-प्रवाह में अपनी सोच को शब्दों में लेख रूप में ढाल देना है अथवा कहीं फिर कोई कहानी बना दे। सबसे अधिक सामान्य तो वही है कि अपनी कल्पना को विकसित करते-करते कोई उपन्यास लिख दिया जाए या फिर किसी नाटक का रूप दे दिया जाए या कोई लघु-कथा अथवा फिर कोई अत्यन्त लघु-गल्प ! मानव सभ्यता की लगभग प्रत्येक भाषा के साहित्य का भण्डार ऐसे असीम-योगदान से भरा पड़ा है। हालांकि, केवल सार्थक लेखन को ही साहित्य में सम्मिलित किया जा सकता है, हरेक कूड़े-करकट को नहीं अर्थात् मूल्यांकन करते समय लेखन की गुणवत्ता अत्यन्त अनिवार्य है। कथा-कहानी में शब्दों का प्रयोग कांव्य की तुलना में कहीं अधिक सरल है क्योंकि काव्य में गहरे भावनात्मक वाक्य-विन्यास के अतिरिक्त ध्वनि, स्वर, लय, ताल, गति, संगीत, रस, अर्थ-विम्व, सौन्दर्य, छन्द-अलंकार, सन्देश आदि कितने ही अतिरिक्त तत्त्व भी होते हैं। ही, कथा-कहानी, लेख, प्रस्ताव आदि में अधिकतर इन सब तत्त्वों से छूट मिल सकती है। वैसे तो गद्य लिखना भी कोई कम कठिन कार्य नहीं है किन्तु कथा-कहानी के सन्दर्भ में मुझे लगता है कि वस्तुतः प्रकृति ने विभिन्न जीवों के रूप में जो कोटि-कोटि कहानियाँ गढ़ रखी हैं उनका तो कोई मेल ही नहीं हो सकता, तो यदि मेरे इस दृष्टिकोण से इस विषय पर दृष्टिपात करें तो केवल मनुष्यों के रूप में ही वर्तमान में 800 से 900 करोड़ कहानियाँ विश्व-भर में उपस्थित हैं, चल रही हैं, आ-जा रही हैं सारी की सारी बेजोड़, प्रकृति ने कहीं कोई दोहराव रक्खा ही नहीं सबका जीवन स्वयं में ही एक अनूठा और असाधारण तत्त्व और महत्त्व लिए हुए है इस धरती पर हर कहानी के समय की वैधता भी एकदम पृथक-पृथक है। चलिए, वैसे मेरे विचारानुसार यदि रोमांचक व रूमानी उपन्यासों, कहानियों आदि के विषय में कहा जाए तो पाश्चात्य संसार के लेखक पूर्ण रूप से अव्यवहारिक, असंभव ढंग की कल्पनात्मक कहानियाँ व उपन्यास (Fiction and Fantasy) लिखने में अधिक रुचि रखते हैं एवं तुलनात्मक दृष्टि से इस विधा में अधिक चतुर एवं सफल भी हैं, हालांकि, संसार में सभी प्रकार के लेखन में विभिन्न क्षेत्र, प्रदेश और भूभाग वाले भिन्न-भिन्न देश, काल, परिस्थिति, परिवेश व पृष्ठभूमि अत्यन्त प्रासंगिक एवं महत्त्वपूर्ण रूप में दिखाई देते हैं। यद्यपि, ऐसा नहीं कि अन्य देशों में महान लेखकों के साथ-साथ प्रसिद्ध कवि नहीं हुए-बिल्कुल हुए हैं तथापि, भारतवर्ष के इतिहास में अनेकानेक भाषाओं में जैसे अनेकों बहुमूल्य बल्कि अनमोल व सारगर्भित काव्य लिखने वाले कवि, महाकवि आदि हुए हैं वैसा धनी धरोहर-पूर्ण एवं अनोखा उदाहरण अन्यत्र मिलना असम्भव है।

About Sat Chit Anand सत् चित् आनन्द

अपनी मौलिक भावनाओं को सहेज कर मूर्त-रूप देते हुए कागज़ पर कुछ अर्थपूर्ण आकार देना और उसे काट-छाँट करके फिर अपने अनुरूप अन्तिम रूप देना-यही लेखन है। लेखन की सबसे सरल विधा धारा-प्रवाह में अपनी सोच को शब्दों में लेख रूप में ढाल देना है अथवा कहीं फिर कोई कहानी बना दे। सबसे अधिक सामान्य तो वही है कि अपनी कल्पना को विकसित करते-करते कोई उपन्यास लिख दिया जाए या फिर किसी नाटक का रूप दे दिया जाए या कोई लघु-कथा अथवा फिर कोई अत्यन्त लघु-गल्प ! मानव सभ्यता की लगभग प्रत्येक भाषा के साहित्य का भण्डार ऐसे असीम-योगदान से भरा पड़ा है। हालांकि, केवल सार्थक लेखन को ही साहित्य में सम्मिलित किया जा सकता है, हरेक कूड़े-करकट को नहीं अर्थात् मूल्यांकन करते समय लेखन की गुणवत्ता अत्यन्त अनिवार्य है। कथा-कहानी में शब्दों का प्रयोग कांव्य की तुलना में कहीं अधिक सरल है क्योंकि काव्य में गहरे भावनात्मक वाक्य-विन्यास के अतिरिक्त ध्वनि, स्वर, लय, ताल, गति, संगीत, रस, अर्थ-विम्व, सौन्दर्य, छन्द-अलंकार, सन्देश आदि कितने ही अतिरिक्त तत्त्व भी होते हैं। ही, कथा-कहानी, लेख, प्रस्ताव आदि में अधिकतर इन सब तत्त्वों से छूट मिल सकती है। वैसे तो गद्य लिखना भी कोई कम कठिन कार्य नहीं है किन्तु कथा-कहानी के सन्दर्भ में मुझे लगता है कि वस्तुतः प्रकृति ने विभिन्न जीवों के रूप में जो कोटि-कोटि कहानियाँ गढ़ रखी हैं उनका तो कोई मेल ही नहीं हो सकता, तो यदि मेरे इस दृष्टिकोण से इस विषय पर दृष्टिपात करें तो केवल मनुष्यों के रूप में ही वर्तमान में 800 से 900 करोड़ कहानियाँ विश्व-भर में उपस्थित हैं, चल रही हैं, आ-जा रही हैं सारी की सारी बेजोड़, प्रकृति ने कहीं कोई दोहराव रक्खा ही नहीं सबका जीवन स्वयं में ही एक अनूठा और असाधारण तत्त्व और महत्त्व लिए हुए है इस धरती पर हर कहानी के समय की वैधता भी एकदम पृथक-पृथक है। चलिए, वैसे मेरे विचारानुसार यदि रोमांचक व रूमानी उपन्यासों, कहानियों आदि के विषय में कहा जाए तो पाश्चात्य संसार के लेखक पूर्ण रूप से अव्यवहारिक, असंभव ढंग की कल्पनात्मक कहानियाँ व उपन्यास (Fiction and Fantasy) लिखने में अधिक रुचि रखते हैं एवं तुलनात्मक दृष्टि से इस विधा में अधिक चतुर एवं सफल भी हैं, हालांकि, संसार में सभी प्रकार के लेखन में विभिन्न क्षेत्र, प्रदेश और भूभाग वाले भिन्न-भिन्न देश, काल, परिस्थिति, परिवेश व पृष्ठभूमि अत्यन्त प्रासंगिक एवं महत्त्वपूर्ण रूप में दिखाई देते हैं। यद्यपि, ऐसा नहीं कि अन्य देशों में महान लेखकों के साथ-साथ प्रसिद्ध कवि नहीं हुए-बिल्कुल हुए हैं तथापि, भारतवर्ष के इतिहास में अनेकानेक भाषाओं में जैसे अनेकों बहुमूल्य बल्कि अनमोल व सारगर्भित काव्य लिखने वाले कवि, महाकवि आदि हुए हैं वैसा धनी धरोहर-पूर्ण एवं अनोखा उदाहरण अन्यत्र मिलना असम्भव है।