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Dhool Me Phool धूल में फूल
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Dhool Me Phool धूल में फूल

By: ANURADHA PRAKASHAN (??????? ??????? ?????? )
175.00

Single Issue

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About this issue

'धूल में फूल' कहानी संग्रह के सभी पाठकों को मेरा प्यार भरा नमस्कार। इससे पूर्व कि आप इस पुस्तक में छपी मेरी समस्त कहानियों को पढ़ें और उन में समाहित विभिन्न किरदारों से रूबरू हों उससे पहले में आपको ईश्वर द्वारा निर्मित मानव रूपी जीव और उसके कर्म और भाग्य से जुड़ी कुछ मुख्य बातें जो मुझे अपने जीवन में अनुभव से प्राप्त हुई हैं उसको आपके समक्ष साझा करना चाहता हूँ। मेरा उद्देश्य यहाँ ज्ञान बाँटना नहीं है अपितु आपसे अपने मन की बात साझा करना मात्र है। मानव रूपी शरीर में ईश्वर ने हमें एक ऐसा मस्तिष्क दिया है जिसकी सोचने और समझने की शक्ति अपार है, मनुष्य के इसी मस्तिष्क से संचालित है मानव 'मन'। 'मन' के क्रिया कलाप न सिर्फ विचित्र है अपितु इसको समझना भी जटिल है, यद्यपि मानव मस्तिष्क में 'मन' मस्तिष्क की गतिविधियों द्वारा ही संचालित होता है परन्तु मन की फितरत ऐसी है कि कई बार यह मस्तिष्क की क्षमताओं से भी पार चला जाता है। मानव 'मन' निरंतर चिंतन एवं गतिशील रहता है जिसको मुख्यतः निम्न तत्व प्रभावित करते हैं उल्लास, भय, करुणा, क्रोध, अहंकार, साहस, विवेक, लालच, वैराग्य, जिज्ञासा, इच्छा शक्ति, अनिच्छा और आलस। ये सभी कारक मानव मन के साथ साथ उसके व्यक्तित्व को भी प्रभावित करते हैं। मानव मन में, इनमें से जो भी तत्व ज़्यादा क्रियाशील होते हैं उसी के अनुरूप मानव कार्य करता है और स्वयं की नियति निर्धारित करता है। अब प्रश्न यह उठता है कि आखिर मानव 'मन' को उपरोक्त अनुसार कैसे विभिन्न कारक प्रभावित करते हैं या कर सकते हैं और जिनका मानव के व्यक्तित्व पर सकारात्मक वा नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसका उत्तर जानने के लिए हमें मनुष्य की शिक्षा, उसके संस्कार, उसके घर, गाँव, मोहल्ला या शहर का वातावरण, उसका खानपान, जीवन शैली, धार्मिक मान्यताएं, जैनेटिक गुण या उसके जीवन में घटी कोई विशेष घटना इत्यादि समस्त बातों को जानना आवश्यक होगा जिनसे मानव 'मन' प्रभावित होता है या यूं कहें कि उपरोक्त बातें मानव मन की दिशा और दशा प्रकट करती हैं। अब एक और प्रश्न पैदा होता है कि क्या विपरीत परिस्थित्तियों में भी मानव मन इसके नकारात्मक प्रभाव से बचकर अपने जीवन को मूल्यवान बना सकता है? तो निसंदेह इसका उत्तर हाँ में होगा, मगर इसके लिए मानव 'मन' को दृढ़ इच्छा शक्ति, संयमी, साहसी और कठोर परिश्रमी जैसे कारकों को स्वयं के भीतर न सिर्फ परिपोषित बल्कि बलशाली भी बनाना होगा। यद्यपि यह कहना भी आवश्यक होगा कि मानव की सफलता उसके कर्म और भाग्य पर भी निर्भर करती है। भाग्य जिसे हम व्यक्ति विशेष की 'नियति' भी कह सकते हैं, जहाँ तक नियति का प्रश्न है तो कभी-कभी यह हमें विरासत में भी प्राप्त होती है, यहीं से कर्म और भाग्य का खेल प्रारंभ होता है। साहसी और विवेकशील पुरुष अपने कर्मों और विवेक द्वारा सभी चुनौतियों पर विजय प्राप्त करते हुए अपनी नियति को अंधकार से उजाले में परिवर्तित कर देते हैं। विपत्ति काल में धैर्य, साहस, दृढ़ इच्छाशक्ति और विवेक का क्रियान्वयन कई समझदार पशु और पक्षियों में भी देखने को मिलता है। मेरा यह पहला कहानी संग्रह 'धूल में फूल' पशु पक्षियों और विशेषकर मानव जीवन को प्राप्त नियति और उनके कर्मों के फलस्वरूप अंधकार से उजाले की ओर प्रस्थान करने का चित्रण है। मेरा यह दृढ़ विश्वास है कि मानव जीवन में हमें जो कुछ भी सुख या दुख प्राप्त है उसका मुख्य कारक हमारा कर्म और भाग्य होता है। अपने जीवन में प्राप्त अनुभव और कल्पना शक्ति के आधार पर रचित्त विभिन्न किरदारों को अपनी कहानियों में संजोकर मैने कहानी संग्रह 'धूल में फूल' की रचना की है। इस कहानी संग्रह की समस्त कहानियों काल्पनिक होते हुए भी आपको वास्तविक जीवन के घरातल पर सच्ची प्रतीत होंगी। इस पुस्तक की कहानियों को पढ़कर यदि आपको सकारात्मक ऊर्जा का आभास हुआ हो या आपकी सकारात्मक सोच में वृद्धि होती है तो इस कहानी संग्रह के माध्यम से, मेरे द्वारा किए प्रयास को में सार्थक समजूंगा। इस कहानी संग्रह पर आपकी प्रतिक्रियाओं का मैं हृदय से आभारी रहूंगा।
हार्दिक शुभकामनाओं सहित ।
अनूप डोभाल

About Dhool Me Phool धूल में फूल

'धूल में फूल' कहानी संग्रह के सभी पाठकों को मेरा प्यार भरा नमस्कार। इससे पूर्व कि आप इस पुस्तक में छपी मेरी समस्त कहानियों को पढ़ें और उन में समाहित विभिन्न किरदारों से रूबरू हों उससे पहले में आपको ईश्वर द्वारा निर्मित मानव रूपी जीव और उसके कर्म और भाग्य से जुड़ी कुछ मुख्य बातें जो मुझे अपने जीवन में अनुभव से प्राप्त हुई हैं उसको आपके समक्ष साझा करना चाहता हूँ। मेरा उद्देश्य यहाँ ज्ञान बाँटना नहीं है अपितु आपसे अपने मन की बात साझा करना मात्र है। मानव रूपी शरीर में ईश्वर ने हमें एक ऐसा मस्तिष्क दिया है जिसकी सोचने और समझने की शक्ति अपार है, मनुष्य के इसी मस्तिष्क से संचालित है मानव 'मन'। 'मन' के क्रिया कलाप न सिर्फ विचित्र है अपितु इसको समझना भी जटिल है, यद्यपि मानव मस्तिष्क में 'मन' मस्तिष्क की गतिविधियों द्वारा ही संचालित होता है परन्तु मन की फितरत ऐसी है कि कई बार यह मस्तिष्क की क्षमताओं से भी पार चला जाता है। मानव 'मन' निरंतर चिंतन एवं गतिशील रहता है जिसको मुख्यतः निम्न तत्व प्रभावित करते हैं उल्लास, भय, करुणा, क्रोध, अहंकार, साहस, विवेक, लालच, वैराग्य, जिज्ञासा, इच्छा शक्ति, अनिच्छा और आलस। ये सभी कारक मानव मन के साथ साथ उसके व्यक्तित्व को भी प्रभावित करते हैं। मानव मन में, इनमें से जो भी तत्व ज़्यादा क्रियाशील होते हैं उसी के अनुरूप मानव कार्य करता है और स्वयं की नियति निर्धारित करता है। अब प्रश्न यह उठता है कि आखिर मानव 'मन' को उपरोक्त अनुसार कैसे विभिन्न कारक प्रभावित करते हैं या कर सकते हैं और जिनका मानव के व्यक्तित्व पर सकारात्मक वा नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसका उत्तर जानने के लिए हमें मनुष्य की शिक्षा, उसके संस्कार, उसके घर, गाँव, मोहल्ला या शहर का वातावरण, उसका खानपान, जीवन शैली, धार्मिक मान्यताएं, जैनेटिक गुण या उसके जीवन में घटी कोई विशेष घटना इत्यादि समस्त बातों को जानना आवश्यक होगा जिनसे मानव 'मन' प्रभावित होता है या यूं कहें कि उपरोक्त बातें मानव मन की दिशा और दशा प्रकट करती हैं। अब एक और प्रश्न पैदा होता है कि क्या विपरीत परिस्थित्तियों में भी मानव मन इसके नकारात्मक प्रभाव से बचकर अपने जीवन को मूल्यवान बना सकता है? तो निसंदेह इसका उत्तर हाँ में होगा, मगर इसके लिए मानव 'मन' को दृढ़ इच्छा शक्ति, संयमी, साहसी और कठोर परिश्रमी जैसे कारकों को स्वयं के भीतर न सिर्फ परिपोषित बल्कि बलशाली भी बनाना होगा। यद्यपि यह कहना भी आवश्यक होगा कि मानव की सफलता उसके कर्म और भाग्य पर भी निर्भर करती है। भाग्य जिसे हम व्यक्ति विशेष की 'नियति' भी कह सकते हैं, जहाँ तक नियति का प्रश्न है तो कभी-कभी यह हमें विरासत में भी प्राप्त होती है, यहीं से कर्म और भाग्य का खेल प्रारंभ होता है। साहसी और विवेकशील पुरुष अपने कर्मों और विवेक द्वारा सभी चुनौतियों पर विजय प्राप्त करते हुए अपनी नियति को अंधकार से उजाले में परिवर्तित कर देते हैं। विपत्ति काल में धैर्य, साहस, दृढ़ इच्छाशक्ति और विवेक का क्रियान्वयन कई समझदार पशु और पक्षियों में भी देखने को मिलता है। मेरा यह पहला कहानी संग्रह 'धूल में फूल' पशु पक्षियों और विशेषकर मानव जीवन को प्राप्त नियति और उनके कर्मों के फलस्वरूप अंधकार से उजाले की ओर प्रस्थान करने का चित्रण है। मेरा यह दृढ़ विश्वास है कि मानव जीवन में हमें जो कुछ भी सुख या दुख प्राप्त है उसका मुख्य कारक हमारा कर्म और भाग्य होता है। अपने जीवन में प्राप्त अनुभव और कल्पना शक्ति के आधार पर रचित्त विभिन्न किरदारों को अपनी कहानियों में संजोकर मैने कहानी संग्रह 'धूल में फूल' की रचना की है। इस कहानी संग्रह की समस्त कहानियों काल्पनिक होते हुए भी आपको वास्तविक जीवन के घरातल पर सच्ची प्रतीत होंगी। इस पुस्तक की कहानियों को पढ़कर यदि आपको सकारात्मक ऊर्जा का आभास हुआ हो या आपकी सकारात्मक सोच में वृद्धि होती है तो इस कहानी संग्रह के माध्यम से, मेरे द्वारा किए प्रयास को में सार्थक समजूंगा। इस कहानी संग्रह पर आपकी प्रतिक्रियाओं का मैं हृदय से आभारी रहूंगा।
हार्दिक शुभकामनाओं सहित ।
अनूप डोभाल