मंच संचालन वस्तुतः एक समन्वित कला है. जिसमें वाणी की सुस्पष्टता, विचारों की संतुलित अभिव्यक्ति, भाव संप्रेषण की गरिमा और ओतू-वर्ग से आत्मीय संवाद-सभी का कलात्मक संगम निहित रहता है। यह कंवल कार्यक्रमों के औपचारिक संचालन की यांत्रिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानव-मन की संवेदनाओं को सुव्यस्थित स्वरूप देने वाली एक सुविचारित साधना है।
वर्तमान समय में, प्रायः जब जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सार्वजनिक अभिव्यक्ति की आवश्यकता बढ़ती जा रही है, मंच संचालन का कौशल सर्वसाधारण के लिए एक अनिवार्य क्षमता के रूप में उभर कर सामने आया है। ऐसे संदर्भ में डॉ. मोहित गुप्ता द्वारा रचित यह महत्वपूर्ण ग्रन्थ 'मंच संचालन एक कौशल सबके लिए 12 अध्याय में विभाजित इस पुस्तक को आद्योपांत मैने स्वयं पढ़ा है। यह ग्रंथ डॉ. मोहित गुप्ता जी के अनुभवजन्य ज्ञान पर आधारित है। अतः विशेष रूप से स्वागत योग्य है? क्योंकि यह विषय को केवल सैद्धांतिक निरूपण तक सीमित न रखकर व्यावहारिक प्रशिक्षण की दिशा में भी सशक्त पथ प्रस्तुत करता है। डॉ. गुप्ता मंच संचालन, बक्तृत्व और व्यक्तित्व विकास के क्षेत्र में दीर्घकाल से सक्रिय एक अनुभवी विद्वान तथा आयुर्वेद चिकित्सक है। जिन्होंने अनेक प्रादेशिक तथा राष्ट्रीय आयोजनों में अपने सफल संचालन-कौशल से अति विशिष्ट पहचान अर्जित की है। कार्यक्रमों या समारोहों के विषय में डूब कर मंच संचालन करते हुए अनेक बार मैंने स्वयं इन्हें देखा है। धार्मिक, प्रशासनिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक तथा शैक्षिक सभी प्रकार के समारोहों का मंच संचालन प्रभावी ढंग से अनेक वर्षों से करते रहे हैं। उनकी वाणी में जहां गम्भीरता तथा मानवीय करुणा का समन्वय विद्यमान है, वहीं भाषा की सरलता, शालीनता तथा प्रभावोत्पादकता भी अद्भुत रूप से वृष्टिगोचर होती है। मंच संचालन के लिए आवश्यक समस्त तत्वों का संक्षिप्त वर्णन इस ग्रंथ में क्रमबद्धता के साथ देखने को मिलता है।
प्रस्तुत कृति की उल्लेखनीय विशेषता यह है कि इसमें मंच संचालन को केवल तकनीको दक्षता न मानकर समग्र व्यक्तित्व निर्माण की प्रक्रिया से जोड़ा गया है। इस पुस्तक में आरम्भिक तैयारी, मंच पर प्रवेश, अतिथियों का सम्मान, कार्यक्रम प्रवाह का नियमन, कार्यक्रम में बिलम्ब होने पर आपदा प्रबंधन, आकस्मिक परिस्थितियों में धैर्य और विनोदपूर्ण संयम तथा समापन की गरिमामय शैली इन सभी पक्षों पर सुविचारित मार्गदर्शन निहित है। साथ ही लेखक ने भारतीय सांस्कृतिक परम्परा, लोक संवेदनाओं तथा मूल्य-प्रधान जीवन-वृष्टि को आधार बनाकर संचालन-कला को कंवल 'प्रदर्शन' नहीं बल्कि 'सेवा' और 'उत्तरवायित्व' के रूप में देखने की प्रेरणा प्रदान की है।
भाषिक दृष्टि से यह ग्रंथ सुगठित एवं संस्कारित हिन्वी का उत्कृष्ट उदाहरण है, किन्तु अनावश्यक क्लिष्टता से रहित है: फलतः यह विद्वतजन, शिक्षकों, प्रशिक्षकों, विद्यार्थियों तथा सामान्य पाठकों सभी के लिए समान रूप से ग्राह्य बन पड़ा है। प्रस्तुति में आवश्यक गाम्भीर्य के साथ प्रसंगानुकूल रोचकता और अनेक प्रासंगिक उदाहरण पुस्तक को बोझिल होने से बचाते है तथा पाठक को सतत् सक्रिय सहभागिता के लिए प्रेरित करते हैं। निस्संदेह, यह कृति उन सभी के लिए पथदर्शी सिद्ध होगी जो मंच पर बीलने, किसी भी प्रकार के आयोजन को संभालने अथवा अपने संप्रेषण को परिष्कृत करने की आकांक्षा रखते है।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि 'मंच संचालनः एक कौशल सबके लिए' शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थानों, समााजिक-सांस्कृतिक संगठनों तथा विविध सार्वजनकि मंचों पर कार्यरत संभाषण कर्मियों के लिए दीर्घकाल तक एक मानक संदर्भ ग्रंथ के रूप में प्रतिष्ठित होगी। डॉ. मोहित गुप्ता को यह रचना भारतीय संवाद संस्कृति को नई ऊर्जा प्रदान करेगी तथा युवा पौड़ी को सजग, संवेदनशील और उत्तरवायी मंच संचालक बनने की दिशा में प्रेरित करेंगी। ऐसी हार्दिक अपेक्षा और शुभकामना के साथ इस ग्रंथ का हार्दिक स्वागत है।
मंच संचालन वस्तुतः एक समन्वित कला है. जिसमें वाणी की सुस्पष्टता, विचारों की संतुलित अभिव्यक्ति, भाव संप्रेषण की गरिमा और ओतू-वर्ग से आत्मीय संवाद-सभी का कलात्मक संगम निहित रहता है। यह कंवल कार्यक्रमों के औपचारिक संचालन की यांत्रिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानव-मन की संवेदनाओं को सुव्यस्थित स्वरूप देने वाली एक सुविचारित साधना है।
वर्तमान समय में, प्रायः जब जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सार्वजनिक अभिव्यक्ति की आवश्यकता बढ़ती जा रही है, मंच संचालन का कौशल सर्वसाधारण के लिए एक अनिवार्य क्षमता के रूप में उभर कर सामने आया है। ऐसे संदर्भ में डॉ. मोहित गुप्ता द्वारा रचित यह महत्वपूर्ण ग्रन्थ 'मंच संचालन एक कौशल सबके लिए 12 अध्याय में विभाजित इस पुस्तक को आद्योपांत मैने स्वयं पढ़ा है। यह ग्रंथ डॉ. मोहित गुप्ता जी के अनुभवजन्य ज्ञान पर आधारित है। अतः विशेष रूप से स्वागत योग्य है? क्योंकि यह विषय को केवल सैद्धांतिक निरूपण तक सीमित न रखकर व्यावहारिक प्रशिक्षण की दिशा में भी सशक्त पथ प्रस्तुत करता है। डॉ. गुप्ता मंच संचालन, बक्तृत्व और व्यक्तित्व विकास के क्षेत्र में दीर्घकाल से सक्रिय एक अनुभवी विद्वान तथा आयुर्वेद चिकित्सक है। जिन्होंने अनेक प्रादेशिक तथा राष्ट्रीय आयोजनों में अपने सफल संचालन-कौशल से अति विशिष्ट पहचान अर्जित की है। कार्यक्रमों या समारोहों के विषय में डूब कर मंच संचालन करते हुए अनेक बार मैंने स्वयं इन्हें देखा है। धार्मिक, प्रशासनिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक तथा शैक्षिक सभी प्रकार के समारोहों का मंच संचालन प्रभावी ढंग से अनेक वर्षों से करते रहे हैं। उनकी वाणी में जहां गम्भीरता तथा मानवीय करुणा का समन्वय विद्यमान है, वहीं भाषा की सरलता, शालीनता तथा प्रभावोत्पादकता भी अद्भुत रूप से वृष्टिगोचर होती है। मंच संचालन के लिए आवश्यक समस्त तत्वों का संक्षिप्त वर्णन इस ग्रंथ में क्रमबद्धता के साथ देखने को मिलता है।
प्रस्तुत कृति की उल्लेखनीय विशेषता यह है कि इसमें मंच संचालन को केवल तकनीको दक्षता न मानकर समग्र व्यक्तित्व निर्माण की प्रक्रिया से जोड़ा गया है। इस पुस्तक में आरम्भिक तैयारी, मंच पर प्रवेश, अतिथियों का सम्मान, कार्यक्रम प्रवाह का नियमन, कार्यक्रम में बिलम्ब होने पर आपदा प्रबंधन, आकस्मिक परिस्थितियों में धैर्य और विनोदपूर्ण संयम तथा समापन की गरिमामय शैली इन सभी पक्षों पर सुविचारित मार्गदर्शन निहित है। साथ ही लेखक ने भारतीय सांस्कृतिक परम्परा, लोक संवेदनाओं तथा मूल्य-प्रधान जीवन-वृष्टि को आधार बनाकर संचालन-कला को कंवल 'प्रदर्शन' नहीं बल्कि 'सेवा' और 'उत्तरवायित्व' के रूप में देखने की प्रेरणा प्रदान की है।
भाषिक दृष्टि से यह ग्रंथ सुगठित एवं संस्कारित हिन्वी का उत्कृष्ट उदाहरण है, किन्तु अनावश्यक क्लिष्टता से रहित है: फलतः यह विद्वतजन, शिक्षकों, प्रशिक्षकों, विद्यार्थियों तथा सामान्य पाठकों सभी के लिए समान रूप से ग्राह्य बन पड़ा है। प्रस्तुति में आवश्यक गाम्भीर्य के साथ प्रसंगानुकूल रोचकता और अनेक प्रासंगिक उदाहरण पुस्तक को बोझिल होने से बचाते है तथा पाठक को सतत् सक्रिय सहभागिता के लिए प्रेरित करते हैं। निस्संदेह, यह कृति उन सभी के लिए पथदर्शी सिद्ध होगी जो मंच पर बीलने, किसी भी प्रकार के आयोजन को संभालने अथवा अपने संप्रेषण को परिष्कृत करने की आकांक्षा रखते है।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि 'मंच संचालनः एक कौशल सबके लिए' शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थानों, समााजिक-सांस्कृतिक संगठनों तथा विविध सार्वजनकि मंचों पर कार्यरत संभाषण कर्मियों के लिए दीर्घकाल तक एक मानक संदर्भ ग्रंथ के रूप में प्रतिष्ठित होगी। डॉ. मोहित गुप्ता को यह रचना भारतीय संवाद संस्कृति को नई ऊर्जा प्रदान करेगी तथा युवा पौड़ी को सजग, संवेदनशील और उत्तरवायी मंच संचालक बनने की दिशा में प्रेरित करेंगी। ऐसी हार्दिक अपेक्षा और शुभकामना के साथ इस ग्रंथ का हार्दिक स्वागत है।