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Shunya ki Dehri se Shikhar tak शून्य की देहरी से शिखर तक
Shunya ki Dehri se Shikhar tak शून्य की देहरी से शिखर तक

Shunya ki Dehri se Shikhar tak शून्य की देहरी से शिखर तक

By: ANURADHA PRAKASHAN (??????? ??????? ?????? )
180.00

Single Issue

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About this issue

प्रधानमंत्री के रूप में श्री नरेंद्र मोदी का व्यक्तित्व
उपन्यास "शून्य की देहरी से शिखर तक एक जनसेवक की संघर्ष यात्रा" में श्री नरेंद्र मोदी का व्यक्तित्व एक ऐसे कर्मयोगी जननेता के रूप में उभरकर सामने आता है, जिसने साधारण परिवेश से आरंभ हुई अपनी जीवन-यात्रा को अथक परिश्रम, अटूट संकल्प और राष्ट्रसेवा के माध्यम से भारत के सर्वोच्च लोकतांत्रिक दायित्व तक पहुँचाया। यह कृति उनके जीवन के संघर्ष, संकल्प और नेतृत्व की विभिन्न अवस्थाओं का साहित्यिक चित्रण प्रस्तुत करती है।
प्रधानमंत्री के रूप में उनका व्यक्तित्व दूरदर्शी नेतृत्व, दृढ़ निर्णय क्षमता, अनुशासन, कार्यनिष्ठा और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण का प्रतीक है। उनके नेतृत्व में सुशासन, जनकल्याण, आत्मनिर्भरता, तकनीकी नवाचार, आधारभूत संरचना के विकास तथा वैश्विक मंच पर भारत की सुदृढ़ उपस्थिति जैसे अनेक आयामों को इस उपन्यास में साहित्यिक संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया गया है।
यह उपन्यास किसी राजनीतिक विमर्श का नहीं, बल्कि एक ऐसे जनसेवक की संघर्ष यात्रा का साहित्यिक दस्तावेज़ है जिसने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य से विचलित हुए बिना निरंतर कर्म को ही अपना पथ बनाया। इसमें श्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व के उन पक्षों को रेखांकित करने का प्रयास किया गया है, जो नेतृत्व, धैर्य, आत्मविश्वास, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति समर्पण की प्रेरणा प्रदान करते हैं।
आशा है कि यह कृति पाठकों को केवल एक व्यक्तित्व से परिचित नहीं कराएगी, बल्कि उन्हें यह विश्वास भी दिलाएगी कि दृढ़ संकल्प, निरंतर परिश्रम और सेवा-भाव के साथ साधारण जीवन से भी असाधारण ऊँचाइयों तक पहुँचा जा सकता है। यही इस उपन्यास का मूल संदेश और सार है।

About Shunya ki Dehri se Shikhar tak शून्य की देहरी से शिखर तक

प्रधानमंत्री के रूप में श्री नरेंद्र मोदी का व्यक्तित्व
उपन्यास "शून्य की देहरी से शिखर तक एक जनसेवक की संघर्ष यात्रा" में श्री नरेंद्र मोदी का व्यक्तित्व एक ऐसे कर्मयोगी जननेता के रूप में उभरकर सामने आता है, जिसने साधारण परिवेश से आरंभ हुई अपनी जीवन-यात्रा को अथक परिश्रम, अटूट संकल्प और राष्ट्रसेवा के माध्यम से भारत के सर्वोच्च लोकतांत्रिक दायित्व तक पहुँचाया। यह कृति उनके जीवन के संघर्ष, संकल्प और नेतृत्व की विभिन्न अवस्थाओं का साहित्यिक चित्रण प्रस्तुत करती है।
प्रधानमंत्री के रूप में उनका व्यक्तित्व दूरदर्शी नेतृत्व, दृढ़ निर्णय क्षमता, अनुशासन, कार्यनिष्ठा और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण का प्रतीक है। उनके नेतृत्व में सुशासन, जनकल्याण, आत्मनिर्भरता, तकनीकी नवाचार, आधारभूत संरचना के विकास तथा वैश्विक मंच पर भारत की सुदृढ़ उपस्थिति जैसे अनेक आयामों को इस उपन्यास में साहित्यिक संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया गया है।
यह उपन्यास किसी राजनीतिक विमर्श का नहीं, बल्कि एक ऐसे जनसेवक की संघर्ष यात्रा का साहित्यिक दस्तावेज़ है जिसने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य से विचलित हुए बिना निरंतर कर्म को ही अपना पथ बनाया। इसमें श्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व के उन पक्षों को रेखांकित करने का प्रयास किया गया है, जो नेतृत्व, धैर्य, आत्मविश्वास, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति समर्पण की प्रेरणा प्रदान करते हैं।
आशा है कि यह कृति पाठकों को केवल एक व्यक्तित्व से परिचित नहीं कराएगी, बल्कि उन्हें यह विश्वास भी दिलाएगी कि दृढ़ संकल्प, निरंतर परिश्रम और सेवा-भाव के साथ साधारण जीवन से भी असाधारण ऊँचाइयों तक पहुँचा जा सकता है। यही इस उपन्यास का मूल संदेश और सार है।