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Roobaru Duniya
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By: Roobaru Duniya
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  • Oct 2014 - Mangal Ke Mayne
  • Price : 25.00
  • Roobaru Duniya
  • Issues 10
  • Language - Hindi
  • Published monthly

About this issue

जिस तरह काफी समय तक काले घने अँधेरे में चलते रहने के बाद जब कहीं से एक रौशनी की किरण नज़र आती है, तो एक थका-हारा हुआ मनुष्य भी ऊर्जा से भर-कर उस ओर दौड़ने लगता है। वैसा ही वातावरण, कुछ समय से, मुझे अपने आस-पास महसूस हो रहा है। जहाँ “इस देश में कुछ बदलने वाला नहीं है” जैसी नकारात्मक सोच फैली हुई थी, वहाँ कुछ कर गुजरने की आशाएँ मन में पनपने लगी हैं। हमने मिलकर भ्रटाचार के खिलाफ आवाज़ उठाई, निर्भया को न्याय दिलाने हम डटकर खड़े रहे, और इस बार के लोक-सभा चुनावों में हमने साबित कर दिया कि अब हमें सिर्फ विकास चाहिए। युवाओं का मन जोश से भरा हुआ है, और यह सब कोई अचानक नहीं हुआ है, ये उन लोगों की कड़ी मेहनत का नतीजा है जिन्होंने पिछले कई वर्षों में थककर हार नहीं मानी, अपने हालातों के बहाने नहीं बनाये, वरन अपनी कड़ी मेहनत के ज़रिये सफलता प्राप्त कर हम सबको सकारात्मक रौशनी की राह दिखाई है। ये लोग हर तरह से हमारे सामने आये हैं। कभी रूढ़ीबद्ध धारणा को तोड़कर अपने आप को साबित करती मैरीकोम के रूप में, तो कभी परमाणु परीक्षण कर देश का सर गर्व से ऊँचा करने वाले वैज्ञानिको के रूप में। अभी हाल ही में ISRइसरो द्वारा सफलता पूर्वक संपन्न हुए मंगलयान मिशन ने देश को विकास पथ पर काफी आगे ले जाकर खड़ा कर दिया है। इस अंक का विशेष लेख हमारे वैज्ञानिको की इसी सफलता को समर्पित है।

About Roobaru Duniya

यह पत्रिका भारत के समाचारपत्रों के पंजीयन कार्यालय (The Registrar of Newspapers for India, Govt of India) द्वारा पंजीयत है जिसका पंजीयन नंबर MPHIN/2012/45819 है। 'रूबरू' उर्दू भाषा का एक ऐसा शब्द जिससे हिंदी में कई शब्द जुड़े हैं, जैसे 'जानना', 'अवगत होना', 'पहचानना', 'अहसास होना' आदि, मौखिक रूप से इसका मतलब है कि अपने आस पास की चीजों को जानना जिनके बारे में हमे या तो पता नहीं होता, और पता होता भी है तो कुछ पूरी-अधूरी सी जानकारी के साथ | इसलिए रूबरू दुनिया का ख़याल हमारे ज़ेहन में आया क्योंकि हम एक ऐसी पत्रिका लोगों तक पहुँचाना चाहते हैं जो फिल्मजगत, राजनीति या खेल से हटकर असल भारत और अपने भारत से हमे रूबरू करा सके | जो युवाओं के मनोरंजन के साथ-साथ बुजुर्गों का ज्ञान भी बाटें, जो महिलाओं की महत्ता के साथ-साथ पुरुषों का सम्मान भी स्वीकारे, जो बच्चों को सीख दे और बड़ों को नए ज़माने को अपनाने के तरीक बताये, जो धर्म जाती व परम्पराओं के साथ-साथ विज्ञान की ऊँचाइयों से अवगत कराये और विज्ञान किस हद तक हमारी अपनी भारतीय संस्कृति से जुड़ा है ये भी बताये, जो छोटे से अनोखे गावों की कहानियां सुनाये और जो तेज़ी से बदलते शहरों की रफ़्तार बताये, जो शर्म हया से लेकर रोमांस महसूस कराये और जो हमें अपनी आधुनिक भारतीय संस्कृति से मिलाये | सिर्फ इतना ही नहीं इस मासिक पत्रिका के मुख्य तीन उद्देश्य "युवाओं को हिंदी और समाज से जोड़े रखना, समाज में व्याप्त बुराइयों को मिटाने के लिए जागरूकता फैलाने और उन्हें दूर करने में युवाओं की भूमिका को बनाये रखना, और नए लेखकों को एक प्लेटफार्म देना" के अलावा हिंदी साहित्य को संग्रहित व् सुरक्षित करने के साथ साथ एक ऊँचाई देना भी है | इस पत्रिका की मुख्य संपादक व प्रकाशक अंकिता जैन हैं |