यह पुस्तक लेखक राज नारायण के जीवन की वास्तविक घटनाओं पर आधारित एक आत्मकथा है, जिसमें एक साधारण ग्रामीण परिवेश में जन्मे बालक की संघर्षों, सीखने, जिम्मेदारियों, सेवा, परिवार, समाज और जीवन अनुभवों से भरी प्रेरणादायक यात्रा का भावपूर्ण वर्णन है।
पुस्तक में क्या है?
गाजीपुर जिले के पहाड़पुर खुर्द गाँव की यादें, परिवार, संस्कार और बचपन और गाँव की मिट्टी ग्रामीण जीवन का सरल सौन्दर्य।
शिक्षा की शुरुआत और संघर्ष
प्राथमिक विद्यालय से लेकर इलाहाबाद में पढ़ाई, पहली बड़ी सफलता और पढ़ाई के साथ जीवन के मूल्य।
आगरा और इलाहाबाद के दिन नये शहर, नये अनुभव, मित्रता, खेल, अनुशासन और व्यक्तित्व का निर्माण।
सरकारी सेवा का अनुभव
ब्रिटिश भारतीय सेना से शासकीय सेवा तक की पारिवारिक पृष्ठभूमि, विभागीय जीवन, स्थानांतरण, चुनौतियों और कार्य-संस्कृति।
परिवार, रिश्ते और जिम्मेदारियाँ
माता-पिता, भाई, जीवन साथी, बच्चों तथा परिवार के साथ जुड़े सुख-दुःख, संस्कार और जीवन के महत्वपूर्ण पड़ाव ।
यात्राएँ और व्यापक अनुभव
देश के विभिन्न शहरों से लेकर जम्मू-कश्मीर और विदेश यात्राओं तक, भारत की विविधता और जीवन के नये दृष्टिकोण।
जीवन से सीखे हुए सबक
संघर्ष, ईमानदारी, अनुशासन, समाज सेवा, मानवीय मूल्य और आने वाली पीढ़ियों के लिए संदेश।