ईश्वर की असीम अनुकम्पा से कुछ लिखने का ज्ञान उत्पन्न हुआ और मैंने उसी क्षण लिखने का निश्चय कर लिया कि कुछ ऐसा लिखा जाए जिससे सम्पूर्ण जन समाज को लाभ हो, ज्ञान मिले, सही रास्ता दिखाई दे, जीवन में सुधार आए। इस विषय को ध्यान में आने पर 'ज्ञान-सिद्धान्त एवं अनुभव' नामक शीर्षक लेकर ईश्वर का ध्यान करके लिखना प्रारंभ कर दिया। मुझे आशा है कि इस पुस्तक को पढ़कर कुछ न कुछ मनुष्य जीवन में सुधार अवश्य ही होगा।
ज्ञान-सिद्धांत एवं अनुभव :
जीवन को सही दिशा देने वाली एक सार्थक साहित्यिक पहल
साहित्य केवल शब्दों का संग्रह नहीं होता, बल्कि वह जीवन को समझने, समाज को दिशा देने और मनुष्य के भीतर श्रेष्ठ विचारों का संचार करने का सशक्त माध्यम भी होता है। एक अच्छी पुस्तक वह है, जो पाठक को केवल जानकारी न दे, बल्कि उसके सोचने, समझने और व्यवहार करने के तरीके में सकारात्मक परिवर्तन लाने की प्रेरणा भी प्रदान करे। इसी दृष्टि से लेखक श्री सतीश चन्द्र लवानियाँ जी की पुस्तक 'ज्ञान-सिद्धांत एवं अनुभव' एक महत्त्वपूर्ण, उपयोगी और उद्देश्यपूर्ण साहित्यिक कृति के रूप में देखी जा सकती है।
इस पुस्तक में दैनिक जीवन में सफल होने के लिए 800 सरल संदेशों को समाहित किया गया है। इन संदेशों में संस्कार, संस्कृति, सामाजिक सरोकारों और जीवनोपयोगी विचारों को सहज भाषा में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। आज के समय में, जब जीवन की गति तीव्र हो गई है और व्यक्ति अनेक प्रकार की प्रतिस्पर्धाओं, अपेक्षाओं तथा मानसिक दबावों के बीच अपना रास्ता तलाश रहा है, तब ऐसे संदेशों का महत्त्व और भी बढ़ जाता है। जीवन में सफलता पाने के लिए केवल शिक्षा, धन अथवा संसाधन ही पर्याप्त नहीं होते; इसके लिए सही दृष्टिकोण, अनुशासन, नैतिकता, धैर्य, विवेक और दूसरों के प्रति संवेदनशीलता भी आवश्यक हैं। ये गुण व्यक्ति के व्यक्तित्व को समृद्ध बनाते हैं और उसे जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्रदान करते हैं।
पुस्तक का शीर्षक ही अपने भीतर एक गहन जीवन-दर्शन समेटे हुए है। 'ज्ञान' हमें सही और गलत के बीच अंतर करना सिखाता है, 'सिद्धांत' हमारे आचरण को दिशा देते हैं और 'अनुभव' हमें जीवन की वास्तविक परिस्थितियों से सीखने की क्षमता प्रदान करता है। जब ये तीनों तत्त्व एक साथ आते हैं, तब व्यक्ति के व्यक्तित्व का संतुलित विकास संभव होता है। ज्ञान के बिना सिद्धांतों की सार्थकता सीमित हो सकती है, सिद्धांतों के बिना ज्ञान दिशाहीन हो सकता है और अनुभव के बिना दोनों का व्यावहारिक पक्ष अधूरा रह सकता है। इस प्रकार यह पुस्तक अपने शीर्षक के माध्यम से ही पाठक को जीवन की एक महत्त्वपूर्ण सच्चाई से परिचित कराती है।
युवा वर्ग के लिए पुस्तक की उपयोगिता
आज का युवा वर्ग देश का वर्तमान भी है और भविष्य भी। उसके कंधों पर परिवार, समाज और राष्ट्र के निर्माण की महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी है। आधुनिक युवा तकनीक, इंटरनेट और सूचना के व्यापक संसार से जुड़ा हुआ है। उसके पास जानकारियों की कमी नहीं है, लेकिन इतनी अधिक सूचनाओं के बीच सही विचारों का चुनाव करना, अपने लक्ष्य को पहचानना और अपने जीवन को सकारात्मक दिशा देना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
ऐसी परिस्थिति में 'ज्ञान-सिद्धांत एवं अनुभव' जैसी पुस्तक युवाओं के लिए प्रेरणा और आत्ममंथन का माध्यम बन सकती है। इसमें संकलित 800 सरल संदेशों को यदि युवा अपने दैनिक जीवन से जोड़कर पढ़ें, समझें और व्यवहार में उतारने का प्रयास करें, तो वे अपनी सोच तथा कार्यशैली को बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।