Salman ka kala hiran shikar prakaran or bishnoi samaj सलमान का काला हिरण शिकार प्रकरण और बिश्नोई समाज
Salman ka kala hiran shikar prakaran or bishnoi samaj सलमान का काला हिरण शिकार प्रकरण और बिश्नोई समाज

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सनातन धर्म में पर्यावरण एवं वन्यजीव संरक्षण केवल एक आधुनिक सामाजिक आवश्यकता नहीं, बल्कि हजारों वर्षों से जीवन जीने की पद्धति (धर्म) का एक अभिन्न अंग रहा है। हमारे प्राचीन ग्रंथों और परंपराओं में प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और सह-अस्तित्व की भावना को गहराई से पिरोया गया है।
1. पर्यावरण संरक्षण का वैचारिक आधार
माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः अथर्ववेद का यह पृथ्वी सूक्त भूमि को माता और मनुष्य को उसका पुत्र मानता है।
पंचमहाभूत की अवधारणा पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश को जीवित तत्व मानकर पूजनीय बनाया गया है।
ईशावास्य उपनिषद : सृष्टि के कण-कण में ईश्वर का वास
(ईशावास्यमिदं सर्वं) मानकर सीमित उपभोग का संदेश दिया गया है।
ऋत (Cosmic Order) : वेदों के अनुसार प्राकृतिक संतुलन बिगाड़ना ब्रह्मांडीय नियमों का उल्लंघन है।
2. वृक्ष और वनस्पतियों का संरक्षण
देवताओं का वास : पीपल में विष्णु, बरगद में शिव और नीम में देवी का वास मानकर इन्हें काटने से रोका गया है।
वृक्षारोपण का पुण्य : पद्मपुराण के अनुसार पेड़ लगाना सीधे स्वर्ग या मोक्ष के मार्ग से जोड़ा गया है।
पवित्र उपवन (Sacred Groves): वन और जंगलों के कुछ हिस्सों को देवताओं को समर्पित कर शिकार और कटाई वर्जित रखी गई।

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