अपनी बात
शब्द मनुष्य के निजी एवं सबसे विश्वसनीय सहयात्री हैं। मनुष्य के पास यदि अपनी भावनाएं, संवेदनाएं, विचार और स्वप्नों का अभिव्यक्त करने का कोई सबसे प्रभावशाली माध्यम है, तो वह शब्द है। जब ये शब्द भावों की उत्पत्ति, भावनाओं की गहनता और चिंतन की प्रौढ़ता से अनुप्राणित होते हैं, तब वे काव्य का रूप धारण कर लेते हैं । काव्य केवल साहित्य की एक विधा नहीं, बल्कि मानव-हृदय की अनंत गाथा का इतिहास है; जिसमें जीवन के विविध रंग, समय के दर्शन, प्रकृति के लय, लोक की सुगंध और आत्मा की अनुभूति एक साथ शामिल है। काव्य मानव-चेतना का वह सेतु है जो व्यक्ति को स्वयं से, समाज को संस्कृति से और वर्तमान को अतीत एवं भविष्य से संयोजित करता है।
इस संग्रह की एक विशेषता इसकी विविधता है। इनमें गीत हैं, कविताएँ हैं, गज़लें हैं, नज़्में हैं, मुक्तक हैं, रुबाइयाँ हैं, दोहे हैं, कुण्डलियाँ हैं, हाइकू हैं, लोकगीत हैं, गद्य-काव्य हैं तथा भारतीय संस्कृति एवं अध्यात्म की अमूल्य परम्परा से प्रेरित कुछ काव्य-रचनाएँ भी हैं । सामान्यतः काव्य-संग्रह में एक या दो विधाओं का प्रभुत्व होता है, लेकिन मेरे लिए काव्य की प्रत्येक विधा भावना की एक पृथक् अभिव्यक्ति होती है। कुछ भाव, गीत का रूप माँगते हैं, कुछ ग़ज़ल की नफासत में अधिक मौलिकताएँ अनुभव करते हैं, कुछ दोहों की सुंदरता में अपनी सार्थकताएँ माँगते हैं, तो कुछ मुक्त छंद में ही अपनी संपूर्ण अभिव्यक्ति प्राप्त कर पाते हैं। इसलिए मैंने किसी एक शैली की सीमा में स्वयं को बांधने के स्थान पर भावों को उनकी स्वाभाविक अभिव्यक्ति का अवसर प्रदान करने का प्रयास किया है।
इस काव्य-संग्रह की एक विशिष्ट पक्ष यह भी है कि इसमें संकलित विभिन्न काव्य-विधाओं - जैसे कविता, गीत, ग़ज़ल, मुक्तक, रुबाई दोहा, कुंडली, हाइकू आदि - के आरंभ में उनके स्वरूप, काव्यगत विशेषताओं तथा व्याकरण एवं शिल्प से संबंधित मूलभूत नियमों का संक्षिप्त एवं सरल परिचय भी दिया गया है। मेरा उद्देश्य केवल अपनी रचनाओं का प्रस्तुतिकरण भर नहीं, बल्कि इन विधाओं के प्रति पाठकों में सही समझ और रुचि का विकास करना भी रहा है। मुझे विश्वास है कि यह संक्षिप्त मार्गदर्शी सामग्री साहित्य-प्रेमियों, विद्यार्थियों तथा नवोदित रचनाकारों के लिए समान रूप से उपयोगी सिद्ध होगी और उन्हें इन काव्य-विधाओं में सृजन की दिशा में प्रेरित एवं मार्गदर्शित करेगी ।
प्रत्येक मानव जीवन एक बहुआयामी विराट काव्य है। इसमें सुख-दुःख, मिलन-विरह, आशा-निराशा, प्रेम-करुणा, संघर्ष-विजय, लोक-परंपरा और आध्यात्मिक जिज्ञासा- सब कुछ शामिल है । इस काव्य संग्रह में आप पाएंगे कि कहीं तो मनुष्य की धार्मिकता को दृष्टि में रखा गया है, कहीं प्रकृति की रमणीयता को शब्दों के रूप में लिया गया है, तो कहीं आत्मा और परमात्मा की धारणा को समझने का प्रयास किया गया है। कुछ रचनाएँ वर्तमान समय के विरोधाभासों विडम्बनाओं और मूल्य-संकटों से संवाद करती हैं, तो कुछ मानव जीवन को सत्य, धार्मिक आदर्श और आध्यात्मिक धार्मिकता की भावना प्रदान की जाती हैं। इसमें कहीं तो प्रेम, करुणा और मानवीय संवेदनाओं की कोमल अभिव्यक्ति है, तो कहीं संघर्ष, संकल्प और आत्मबल की प्रेरणा ।
आचार्य मम्मट अपने ग्रन्थ काव्य प्रकाश में लिखते हैं -
काव्यं यशसेऽर्थकृते व्यवहारविदे शिवेतर क्षतये । सद्यः परनिर्निर्वृतये कान्तासम्मिततयोपदेशयुजे । ।
अर्थ-काव्य की रचना- यशप्राप्त, अर्थोपार्जन, व्यवहार-ज्ञान, अमंगल-निवार्ण, सहृदय को तुरंत चरम रस आनंद प्रदान कराने तथा प्रियतम के समान मधुर रीति से उपदेश देने में उपयोगी है। आचार्य मम्मट आगे यह भी कहते हैं कि "शब्दार्थों सहितौ काव्यम्" अर्थात् न केवल शब्द काव्य हैं और न केवल अर्थ; बल्कि जब दोनों का सुंदर सामंजस्य होता है, तब काव्य प्रकट होता है ।