मेरी कहानियाँ समाज में रहने वाले सामान्य व्यक्ति की विभिन्न परिस्थितियों एवं विषमताओं पर उनकी प्रतिक्रिया के अवलोकन पर आधारित हैं। इस कहानी संग्रह में रूढ़िवादिता पर प्रहार के साथ कहीं संबंधों को परखने का एहसास भी है। कई घटनाएँ जीवन की अनछुए पहलुओं को दर्शाती हैं जैसे- 'ममता मिल गयी', 'विडंबना' 'होली का हुड़दंग, जीतनी की जीत इत्यादि हैं।
मेरी यह कहानी संग्रह पूजनीय मेरी माँ शारदा सिन्हा एवं स्व. पिता के चरणों में समर्पित है। इस पुस्तक के लिए मेरे पति एवं पुत्र का भी सहयोग है। मेरी कलम एक उपकरण मात्र ही नहीं बल्कि जीवन की विविध सत्य और साक्ष्य भी प्रस्तुत करती हैं।
मैं कह सकती हूँ कि - कुछ देखा, कुछ सुना, कुछ सहा, कुछ कहा ही मेरी हर एक कहानी में यथार्थ को साथ जोड़ने का अवश्य प्रयास किया गया है।
आशा है पाठकगण अवश्य ही इन कहानियों का आनंद लेंगे।
वीणा प्रसाद पटना (बिहार)
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